शिवजी को शनिदेव के कारण बदलना पड़ा अपना रूप – SHIV JI AND SHANIDEV STORY

By | July 14, 2020
शिवजी को शनिदेव के कारण बदलना पड़ा अपना रूप – SHIV JI AND SHANIDEV STORY

शिवजी को शनिदेव के कारण बदलना पड़ा अपना रूप – SHIV JI AND SHANIDEV STORY

दोस्तों एक बार की बात है शनि देव भगवान शंकर के धाम हिमालय पहुंचे उन्होंने अपने गुरुदेव भगवान शंकर को प्रणाम करके उनसे आग्रह किया हे प्रभु मैं कल आपकी राशि में आने वाला हूं यानी मेरी वक्र दृष्टि आप पर पड़ने वाली है !

शनिदेव की इस बात को सुनकर भगवान शंकर हैरान रह गए और बोले हे शनिदेव कितने समय तक अपने वक्त दृष्टि मुझ पर रखेंगे शनिदेव बोले भोलेनाथ कल सुबह पहर के लिए मेरी वक्र दृष्टि आप पर रहेगी शनिदेव की बात सुनकर भगवान शंकर !

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थोड़ा चिंतित हो गए और शनि की वक्र दृष्टि से बचने का उपाय सोचने लगी शनि की दृष्टि से बचने के लिए अगले दिन भगवान शंकर मृत्यु लोक यानी पृथ्वी पर आए भगवान शंकर ने शनिदेव और उनकी वक्र दृष्टि से बचने के लिए एक हाथी का रूप धारण कर लिया !

भगवान शंकर ने हाथी के रूप में सवा पहर तक समय व्यतीत किया और शाम होने पर भगवान शंकर ने सोचा अब दिन गुजर चुका है और शनि देव की दृष्टि का उन पर कोई असर नहीं होगा इसके बाद भगवान शंकर पुनः कैलाश पर्वत पर लौट गए भगवान शंकर प्रसन्न मुद्रा में जैसे ही कैलाश पर्वत पर पहुंचे उन्होंने शनि देव को !

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उनका इंतजार करते हुए पाया भगवान शंकर को देख शनिदेव ने उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया भगवान शंकर मुस्कुराए और शनिदेव से बोले आपकी दृष्टि का मुझ पर कोई असर नहीं हुआ यह सुनकर शनिदेव फिर मुस्कुराते हुए बोले मेरी दृष्टि से ना तो देवता बच पाई है !

और ना ही दानव यहां तक आप ही मेरी दृष्टि से नहीं बच पाए यह सुनकर भगवान शंकर आश्चर्यचकित रह गए शनिदेव ने कहा मेरी ही दृष्टि के कारण आपको एक पहर समय के लिए देव योनि को छोड़कर पशु योनि में जाना पड़ा इस प्रकार मेरी वक्र दृष्टि आप पर पड़ गई और आप भी इसके पात्र बन गए शनिदेव की न्याय प्रिय

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को देखकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हुए और शनि देव को हृदय से लगा लिया तो दोस्तों आपको कैसी लगी आज की यह कहानी ऐसी और नई कहानियों के लिए बने रहे

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