रक्षा बंधन की कहानी Raksha Bandhan ki Kahani, Rakhi

By | August 3, 2020
रक्षा बंधन की कहानी Raksha Bandhan ki Kahani, Rakhi

रक्षा बंधन की कहानी Raksha Bandhan ki Kahani – Rakhi

आज की हमारी इस कहानी में हम आपके लिए भाई बहन के पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन की एक बहुत सुंदर कहानी लेकर आए हैं Raksha Bandhan ki Kahani एक समय की बात है किसी नगर में एक साहूकार के तीन बेटे तीनों बहू रहती थी साहूकार की सबसे छोटी बहू सुशील और संस्कारी थी साथ ही वह भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थी !

सावन के महीने में साहूकार की दोनों बहुएं रक्षाबंधन के त्यौहार पर अपने अपने पीहर जाने की तैयारी करने लगी सुबह जल्दी उठकर घर का सारा काम करने लगी तो छोटी बहू ने पूछा क्या बात है दीदी आज इतनी जल्दी जल्दी काम क्यों कर रही हो तो उसकी जेठानी बोली कल रक्षाबंधन का त्योहार है !

हम सभी को अपने अपने भाई को राखी बांधने अपने पीहर जाना है तेरा तो कोई भाई नहीं है तू क्या जाने रक्षाबंधन के त्यौहार का महत्व भाई बहन के रिश्ते का महत्व छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी और वह भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा के समक्ष खड़ी होकर खूब रोई और बोली यदि मेरा कोई भाई होता तो आज मैं भी अपने पीहर जाती !

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अगले दिन रक्षाबंधन का त्यौहार था सुबह-सुबह उसके घर उसके दूर के रिश्ते का एक भाई आया और आकर साहूकार से बोला यह मेरी बहन है मैं इसके दूर के रिश्ते का भाई हूं और इसे रक्षाबंधन के त्यौहार पर अपने साथ अपने घर ले जाने आया तब साहूकार का बेटा बोला लेकिन इसका तो कोई भाई नहीं है !

तुम कौन हो उसके समझाने पर साहूकार और उसका बेटा मान गया और छोटी बहू को उसके साथ भेजने को तैयार हो गए परंतु छोटी बहू के पति के मन में कुछ शंका थी वह बोला आप इसीलिए तो जाइए परंतु इसे वापस लेने मैं खुद आऊंगा ऐसा कह कर उन्होंने छोटी बहू को उसके भाई के साथ रवाना करा रास्ते में चलती चलती छोटी बहू ने अपने भाई से कहा भैया इतने सालों तक कहां थे और पहले मुझसे रक्षाबंधन पर कभी राखी बंधवाने क्यों नहीं आए तो उसका भाई बोला बहन में सात समुंदर पार परदेस में कमाने गया था !

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दोनों अपने घर पहुंचे तो घर में भाभी ने अपनी ननद का स्वागत किया खूब आवभगत करी फिर उन्होंने रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया ऐसे ही हंसी खुशी समय बीत गया एक दिन छोटी बहू का पति उसे लेने उसके घर आया महल जैसा घर ऐसो आराम देकर चकित रह गया भाई और भाभी ने उसकी खूब आवभगत करी अगले दिन सुबह-सुबह भाई और भाभी ने उसे उसके घर के लिए रवाना किया विदा करते समय उसे खूब सोना चांदी हीरे जवाहरात आदि दिए !

थोड़ी दूर जाने पर छोटी बहू का पति बोला अरे मैं गलती से अपना कुर्ता व ही भूल आया हूं तब वह बोली कोई बात नहीं आपका कुर्ता तो पुराना था इतनी दूर वापस जाएंगे तो घर पहुंचते-पहुंचते अंधेरा हो जाएगा लेकिन उसका पति बोला नहीं मैं वापस जाकर अपना कुर्ता ले ही आता हूं ऐसा कह कर वह दोनों उसके भाई के घर के लिए वापस रवाना हुए जैसे ही भाई के घर के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा भाई के महलों में घर की जगह एक पीपल का बड़ा सा पेड़ है !

और उस पेड़ पर छोटी बहू के पति का कुर्ता टंगा है यह देखकर बहुत नाराज हुआ और अपनी पत्नी से बोला यह क्या काला जादू है कौन था वो जो तेरा भाई बनकर तुझे यहां लेकर आया था मुझे तो शुरु से ही शक था इसीलिए मैं तुझे बता कौन था वो ऐसा कह कर वो छोटी बहू को मारने लगा इतने में तेज प्रकाश के साथ भगवान श्रीकृष्ण वहां स्वयं प्रकट हुए और बोले मत मारो इसे यह मेरी बहन है !

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हर साल रक्षाबंधन के त्यौहार पर यह मुझे राखी बांधती आई है और अब मैंने इसका भाई होने का फर्ज निभाया है इसे मैंने अपनी बहन माना है छोटी बहू और उसका पति हाथ जोड़कर श्री कृष्ण के चरणों में गिर गए तो दोस्तों कैसी लगी आपको आज की हमारी यह कहानी हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर दीजिएगा जय श्री कृष्ण !

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