Kya hota hai jab aatma badle, Horror stories in hindi

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मेरा नाम धीरज है (Horror stories in hindi) मैं जो बात आपको बता रहा हूं यह 2 साल पहले की है जब मैं नाइंथ क्लास में पढ़ता था|

एक दिन मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ नदी किनारे सोता हुआ अपने घर जा रहा था तो रास्ते में हमें एक मटका रखा दिखाई दिया जिसके ऊपर लाल रंग का कपड़ा तो मैं उस मटके के ऊपर पत्थर फेंक के को तोड़ने की कोशिश करने लगा मेरे दोस्तों ने मुझे बहुत मना किया|

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लेकिन फिर भी मैंने उस मटके को लात मार के तोड़ दिया और उसके बाद हम सब अपने अपने घर वापस आ गए हैं लेकिन उसी रात मुझे एक बहुत ही डरावना सपना आया जैसे कि कहीं से कोई काला सांप ऊपर बैठ गया हूं|

लेकिन मैंने उसे अपने से ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन उस रात के बाद से हर रात मुझे डरावने सपने दिखाई देने लगे लेकिन सिर्फ साफ नहीं आ रहे थे बाकी सब कुछ नॉर्मल था साथ ही बता दूं कि हम किस गांव में रहते हैं दोस्त आप लोग टॉयलेट के लिए गांव के बाहर नदी जंगल नहीं चाहते हैं|

तो करीब एक हफ्ते बाद मैं और मेरे पापा शाम के वक्त पलट के लिए जंगल में गए हुए थे एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठा था अपना फोन चलाते हुए मेरे पापा भी थोड़ी दूर टॉयलेट करने चले गए मुझे वहां बैठे बस 2 मिनट ही हुई थी कि पापा वहां से मुझे हैरानी तो हुई कि कैसे हैं|

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लेकिन मैंने ज्यादा नहीं सोचा हम नदी पार करके अपने खेत में घूम के आते हैं हमारा खेत उस नदी से करीब 100 मीटर दूर पड़ता है तो हम दोनों पैदल पैदल नदी पार करते हुए खेत की तरफ चल दिए पापा मेरे आगे आगे चल रहे थे लेकिन मुझसे कुछ भी बात नहीं कर रहे थे बस चुपचाप चले जा रहे थे|

हम लोग नदी से काफी दूर आ गए थे लेकिन तभी मेरे फोन पर मेरे पापा की कॉल आई है वह देखकर मैं सॉफ्ट नहीं गया क्योंकि मेरे पापा को मेरे आगे पर चल रहे थे तो वह कहीं कौन कर रहा था मैंने कॉल उठाई तो दूसरी तरफ से पापा की आवास आए वह मेरे पापा ही थे|

पापा बोले तू कहां चला गया है मैं कब से तेरा यहां वेट कर रहा हूं तो मैंने कहा लेकिन पापा आपने ही तो मुझे खींच चलने को कहा था मैं तो आपके पीछे-पीछे ही चल रहा हूं मेरी बात सुन तू मुझे डरने लगे बोले तो किसके साथ जा रहा है जल्दी से भागकर मेरे पास आ जा और पीछे मुड़कर मत देख लो मैंने वैसा ही किया और उसी वक्त वहां से भागने लगा मैंने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा|

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आगे पहुंचा तो देखा कि पापा भी नदी पार करके उसे ढूंढने आ गए थे पापा को देखकर मैं रोने लगा मैंने पापा से कहा कि आप जल्दी से घर चलो मैं आपको सारी बात बताता हूं घर आने के बाद मैंने अपने पापा को उस दिन की सारी बात बता दी जैसे मैंने रास्ते में उस मटके को छोड़ा था|

पापा ने मुझे बहुत डांट लगाई मेरी मम्मी भी रोने लगी फिर अगले ही दिन पापा एक बाबा को हमारे घर लेकर आए पूजा करवाने के लिए पूजा के बीच में ही बाबा ने मुझसे पूछा कि तुमने उस दिन क्या-क्या किया था मैंने कहा मैंने तो बस मटके को लात मारी थी तो बाबा बोले नहीं तो मैं उस मटके को लात मारकर गालियां भी दी थी मैंने डरते डरते कहा हां|

बाबा भोले मटके के ऊपर काला जादू किया हुआ था और अब वह सब कुछ तुम्हारे ऊपर आ गया है|

बाबा ने हमारे घर के चारों तरफ पूजा करके की रेट होगी और कहा कि तुम्हारे परिवार में आप कोई भी सोमवार और शुक्रवार को मास नहीं खाएगा अगर किसी ने खाया तो इस पूजा का और इन कीड़ों का असर खत्म हो जाएगा|

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उस दिन से लेकर अभी तक हमारे घर के सब लोग सोमवार और शुक्रवार के दिन मांस नहीं खाते मुझे आज भी यकीन नहीं होता कि मेरी वह एक छोटी सी गलती इतनी बड़ी हो सकती है मुझे अब भी रात में डरावने सपने आते हैं|

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मेरा नाम दिव्या है मैं आपको कुछ सच्ची घटनाओं के बारे में बताना चाहती हूं यह सब कुछ मेरे साथ तो नहीं हुआ लेकिन मेरे चाहने वालों के साथ हुआ था यह सबसे पहली बार मुझे मेरे बीच वाले मामा ने बताई थी यह बहुत साल पहले की बात है उन दिनों मेरे नानाजी झांसी के पास लोहारदा का नाम की एक्सीडेंट में रहते थे|

उनके घर के सामने ही एक और फैमिली रहती थी जिसमें एक आंटी अंकल और उनका एक बेटा से बेटा उनको शादी के 10 साल बाद बहुत करने के बाद जिस वजह से उसके मां-बाप को बहुत प्यार करते थे उसका नाम सनी था और उस टाइम वह 17 साल का ही था|

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ओझा बोलो के सामने ही इग्नोर करती थी जहां से ट्रक्स वगैरह निकलते रहते थे तो एक दिन मेरे मामा कहीं बाहर थे उसको अपने घर आ रहे थे तभी उनको तनी वहां से जाता हुआ दिखाई दिया बहुत तेजी से चलता हुआ कहीं जा रहा था|

तो मामा ने उससे पूछा इतनी सुबह-सुबह कहां जा रहे हो तो सही बोला भैया मैं बहुत जल्दी में हूं आप बस मेरे घर जाकर मेरी मां को बोल देना कि मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं और आपको और पापा को कभी परेशान नहीं देख सकता|

तो मामा ने उससे पूछा लेकिन सनी ऐसी बातें क्यों कर रहे हो तुमको हुआ क्या है तनी बोला भैया अभी मुझे जाना होगा मैं आपसे बाद में मिलता हूं और इतना है कि वहां से चला गया|

उसके जाने के बाद मामा वापस अपने रास्ते जाने लगे तो कुछ दूर जाकर उन्होंने देखा कि एक जगह पर सारे लोग जमा हो रखे थे उन्होंने लोगों के बीच में जाकर देखा कि वहां एक्सीडेंट हो रखा था और एक लड़के की ऑन द स्पॉट डेथ हो गई थी|

मामा ने उस लड़के का चेहरा देखा तो उनको यकीन ही नहीं हुआ नहीं था अभी अभी बात हुई थी सड़क पर पड़ी हुई थी यह दूसरी घटना हमारे गांव के घर की है जो कि बिहार के छपरा जिले में पड़ता है|

हम लोग शुरू से ही पटना में हैं हैं लेकिन गांव में मेरे दादाजी और चाचा लोग आज भी रहते हैं वहां जो हमारा घर है वह दो मंजिल का घर है और बहुत ही पुराना है सैकड़ों साल पुराना घर जब बना था उन दिनों सीमेंट भी नहीं होता था इसके लिए पूरा घर लकड़ी मिट्टी और ईटों से बना हुआ है|

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लेकिन दो मंजिल का होने के बाद भी वह घर तीन मंजिल मकान से भी बड़ा लगता है|

घर की बनावट भी बिल्कुल पुराने जमाने की है रात में जब वह लाइट जाती है तो वह है बिल्कुल भूतिया घर लगने लगता है|

हमारे उस घर में घर के बहुत से लोगों ने कई अजीब अजीब सी से देखिए और महसूस की है उस घर में हमारे बहुत से लोगों की मौत भी हो चुकी है|

अभी सबसे लास्ट में जो उस घर में हुई थी वही मेरी छोटी दादी की उस दिन वह किचन में तंदूर में आग जला रही थी तभी उनकी साड़ी में आग लग गई उस वक्त घर में उनके अलावा और कोई नहीं था |

इसलिए वह वही जल के मर गई लेकिन उनके मरने के बाद भी घर के कई लोग कई बार उनके बारे में बताते हैं|

साथ ही बता दो कि हमारे उस घर के थोड़ा दूर एक मुस्लिम कब्रिस्तान और एक क्रिश्चियन ग्रेव्यार्ड भी पड़ता है और वहां से करीब 5 किलोमीटर दूर एक श्मशान घाट भी पड़ता है वैसे तो मुझे उस घर में कभी कुछ ऐसा महसूस नहीं हुआ लेकिन एक बार मैं आप सब को बताना चाहती हूं|

यह 25 जुलाई 1997 की बात है सुबह-सुबह का टाइम था एक रात पहले बहुत तेज बारिश हुई थी उसकी वजह से अंदर आना था तो सुबह-सुबह दादाजी ब्रश करने बाहर आए और किचन के बगल में ही बैठे थे साथ ही बता दो कि हमारे आंगन में एक भी सभी दादाजी को उस पेड़ के नीचे एक औरत अनुसार आई औरत देखने में बिल्कुल मेरी जान कैसी लग रही थी|

लेकिन दादी तो उसमें काम कर रही थी दादा जी को बहुत हैरानी हुई एक बार उस औरत को देखते और एक बार दादी को बिल्कुल दादी के जैसी थी उन दोनों में सिर्फ एक अंतर था|

औरत एक साड़ी पकड़कर चल रही थी लेकिन मेरी दादी छड़ी लेकर नहीं चलती थी और दादा जी के देखते ही देखते और घर के अंदर घुस गई दादाजी ने जल्दी से आवास देखें घर के स्टाफ लोगों को बुलाया और उस तरफ जाकर देखा तो वहां नहीं थी|

लेकिन हैरानी इस बात की थी और अब तो नहीं मिली लेकिन कीचड़ में उसके पैरों के निशान जरूर सपने देखे थे और जिस पर दादाजी ने उसको गायब होते देखा था उसी वक्त मेरी लोकेशन में काम कर रही थी वह फिसल कर गिर गई और कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई पैरों के निशान भी उनके आंगन में कई दिनों तक बने रहे लेकिन दादी का श्राद्ध पूरा होने के बाद ही वह निशान भी अपने आप गायब हो गए|

जी को कुछ समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हुआ अगले ही दिन ज्यादा जीने को पेड़ भी कटवा दिया उसके नीचे उन्हें वह औरत दिखाई दी थी काफी दिनों तक सब कुछ नॉर्मल चलता रहा|

1990 9 फरवरी का टाइम था दादा जी की तबीयत ठीक नहीं रहती थी 1 दिन ऐसा हुआ कि दादाजी अचानक से बहुत डरने लगे वह बार-बार बोल रहे थे कि वह मुझे लेने आया है जल्दी से मुझे हनुमान चालीसा सुनाओ बाकी सब लोग उनके पास इकट्ठा हो गए थे दादा जी ने खिड़की से बाहर की तरफ इशारा करके कहा कि वह देखो वह मुझे लेने आया है जब हमने खिड़की से बाहर देखा तो देखा कि एक बहुत बड़ा कोई पक्षी बाहर बैठा था|

लेकिन हमें समझ नहीं आ रहा था वह कौन सा पक्षी है वह बिल्कुल जरूर के जैसा लग रहा था|

इससे पहले हम कुछ कर पाते हैं दादाजी के सांसे बंद हो गई और उनकी सांस बंद होते ही वह पक्षी भी वहां से उड़ गया फिर जिस दादाजी की एक कमरे में बैठे बातें कर रहे थे तभी सब को कमरे में से गंदी बदबू आने लगी वह बंदूक सोफे के नीचे आ रही थी सोफा हटाकर देखा तो वहां किसी इंसान की रोटी पड़ी थी वह देखकर हमें बहुत हैरानी हुई ऐसा कैसे हो सकता है क्योंकि हम सब बहुत देर से वहां बैठे हुए थे लेकिन यह बात यहीं नहीं रुकी घर में जगह जगह थी मिलने लगी ऐसी ऐसी जगहों पर भी जब कोई इंसान सोच भी नहीं सकता था|

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तो हमने एक पंडित को घर में बुलाकर इस बारे में पता किया तो उसने बताया कि आपके दादा जी को मोक्ष की प्राप्ति हुई है इसीलिए उनकी पार्टी मिल रही है लेकिन ऐसा सिर्फ दादा जी के साथ ही हुआ था इसके अलावा हमने कभी किसी के साथ ऐसा नहीं सुना था यह आखरी बार जो मैं बता रही हूं यह हमारे कॉलेज की है मैं जयपुर की एक टीम यूनिवर्सिटी में पढ़ा कर दी थी हम जिस कैंपस में रहते थे वह बहुत सारे बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल से बताते हैं कि उनमें से एक बॉयज हॉस्टल के थर्ड फ्लोर पर एक बार एक लड़के ने सुसाइड किया था जिसके बाद उस पूरे थर्ड फ्लोर को ही बंद कर दिया गया था|

अपने सीनियर से हम उस हॉस्टल के बारे में बहुत सी बातें सुना करते थे लेकिन उन सब बातों पर कभी यकीन नहीं होता था उस फ्लोर पर हमेशा पूजा भी की जाती थी पूजा करने के बाद उस फ्लोर को फिर से बंद कर दिया जाता लेकिन एक बार किसी वजह से उस फ्लोर पर पूजा नहीं की गई तो अगले ही दिन लोगों ने देखा कि पूरे थर्ड फ्लोर पर संदूक फैला हुआ था लेकिन ऐसा कैसे हो सकता था क्योंकि वह बिल्डिंग को सिर्फ क्लासेस के लिए ही यूज किया जाता था क्लासेस खत्म होने के बाद बिल्डिंग पर ताला लगा दिया चाहता था क्योंकि अगले दिन सुबह 8:00 बजे खुलता था|

तो ऐसा तो नहीं हो सकता था किसी ने रात में वहां जाकर चंदू डाल दिया हो मेरा नाम क्रिश्चन है मैं कर्नाटका के दांडेली सिटी में रहता हूं मैं जो बात आपको बता रहा हूं वह मेरे एक दोस्त के चाचा के साथ घटी थी तो एक दिन मेरे दोस्त से चाचा रात करीब 1:30 बजे शहर से गांव की तरफ जा रहे थे बाइक पर उनके साथ उनका एक और दोस्त भी बैठा था तो जब वह लोग बाइक से जा रहे थे तो उनको रास्ते के बीच में एक औरत खड़ी दिखाई थी सफेद कपड़ों में उन्होंने दूर से औरतों को वहां खड़े देखा तो सोचा कि शायद उसको मदद की जरूरत है भाई को उसके पास ले जाने लगे पीछे बैठे उनके दोस्त ने उनको मना भी किया लेकिन वह नहीं माने|

और भाई किधर औरत के आगे ले जाकर रोक दी लेकिन जब उन्होंने पीछे मुड़कर उस औरत से बात करने के लिए देखा तो देखा कि वह वहां से गायब हो चुकी थी उनको उनका फोन होगा और वह बाइक लेकर फिर से चल पड़े लेकिन फिर कुछ दूर आगे जाते ही उनको भी औरत फेसबुक पर सामने से एक शक्ति आ रहा था दोनों जोर से चिल्लाए उस औरत को आवाज देने के लिए सामने से ट्रक आ रहा है लेकिन वह औरत नहीं होती और उनके देखते ही देखते वह औरत में से आरपार हो गया वह देखकर वह दोनों बहुत डर गए और तेरी से बाइक बताते हुए अपने घर आ गए उसके बाद औरत उनको फिर कभी दिखाई नहीं दी मेरा नाम निखिल नायक है उड़ीसा के संबलपुर डिस्ट्रिक्ट का रेट वाला हूं|

यह आज से 5 साल पहले की बात है उन दिनों में मेरा बड़ा भाई करूंगी और उसका 12 आशीष भैया हम तीनों रोज सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए थे वह नवंबर का महीना चल रहा था और सुबह-सुबह ठंड रहती थी तो ऐसे ही एक दिन मेरी बहुत जल्दी आंख खुल गई थी 3:00 बज रहे थे मैं उसके साथ हुआ और फिर अपने भैया को उठाने गया और उनको बोला कि जब तक आप रेडी नहीं हो जाते तब तक मैं थोड़ा बाहर घूम के आता हूं और उसके बाद मैं अकेला ही वह पहले निकल गया मैं बाहर जाकर बस खड़ा ही हुआ था इधर उधर देख रहा था कि तभी मैंने देखा कि सामने वाले घर के सामने जो कि मेरे ट्यूशन टीचर का ही घर था उसके सामने एक बूढ़ा आदमी खड़ा उस घर की तरफ देख रहा था|

मुझे बहुत हानि हुई इस वक्त उनके घर के सामने खड़ा है मैंने जल्दी से अपनी जेब से खून निकाला भैया को कॉल करने के लिए लेकिन फोन निकालते ही मुझे लगा तो नहीं गया तुम्हें जल्दी से उस तरफ गया और उसको देखने लगा लेकिन वह वहां नहीं कहा यहां तक कि दूर-दूर तक सड़कों पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन अपने घर पर आकर मैंने देखा आदमी खड़ा दिखाई दिया और इसका सीधा मेरी तरफ भी देख रहा था|

वह देखकर मेरे तो हो चुका है मैंने सोचा अभी तो मैं वहां देख कर आया हूं अभी 1 मिनट पहले तक तो वह वहां नहीं था वह भी अचानक से कहां से आ गया मैंने जल्दी से आशीष भैया को कॉल किया आप जल्दी से बाहर आ जाओ मुझे बहुत डर लग रहा है तो भैया मेरा मजाक उड़ाने लगे बोले इतना क्यों डर रहा है उन्हें कोई भूत देख लिया है क्या मैंने कहा मैंने अभी-अभी एक भूत देखा है लेकिन उन लोगों ने मेरी बात पर यकीन नहीं किया उस दिन के बाद से मैंने मॉर्निंग वॉक पर जाना ही छोड़ दिया|


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