इरम की ज़िंदगी का आखिरी सफर, horror story in Hindi

 

इरम की ज़िंदगी का आखिरी सफर, bhutiya kahani
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(Horror stories in Hindi) हिमालय की गोद में बसा कश्मीर एक तरफ बर्फ में लिपटी हुई खूबसूरत वादियां तो दूसरी और के बीच में बहती झीलें झाड़ियों से भरे जंगल यहां पर भारी हो जाए तो इसकी खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं यही वजह है इससे धरती का स्वर्ग कहा जाता है तो दूसरी और इससे जुड़ी कई खतरनाक राज और घटनाएं इस जगह से जुड़ी एक सच्ची घटना जो हमारी एक सब्सक्राइब ने हमें बताई है अगर आप भी नहीं की तरह अपनी कहानी हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो अभी फॉलो करें हमें डर पाइल्स के इंस्टाग्राम या फेसबुक पेज पर एक सुबह एक ट्रेन जिसकी हर दरवाजे पर लोग उसे पड़े थे उस भीड़ को चीरते हुए

horror story in hindi - सपनो की दुनिया में | Horror Night Story

सलवार सूट में एक लड़की काफी मुश्किलों के साथ आगे बढ़ी जा रही थी उसका एक हाथ दरवाजे को कसकर थामे हुए था तो एक हाथ एक अधेड़ महिला को खींचे जा रहा था यह है इरम वह महिला उसकी मां थी पीछे पीछे उसके पिताजी भी भीड़ को चीरते हुए नीचे आ गए वह अपने माता-पिता के साथ कश्मीर में हमेशा के लिए रहने आई थी कश्मीर में उनका अपना घर था वह नए-नए शिफ्ट हुए थे रात का चौथा एमपी माते तारों की चमक चारों ओर फैली हुई थी इरम अपने छत में सितारों की और देखते हुए अपने ख्यालों में मदहोश खोई हुई थी यह ठंडी ठंडी हवाएं दोस्ती कानों और प्यारे चेहरे को चूमते हुए

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बढ़ा रही थी तो दूसरी और एक घर छोड़कर एक नौजवान जो एकदम प्यार भरी आंखों से इरम की ओर देख रहा था उसका नाम सलीम था कुछ देर बाद इरम ने उसे भी देखा उसकी ओर मुड़ी और देखा वह उसका बचपन का दोस्त सलीम था जब कुछ देर बाद सलीम ने कहा तुम यहां घूमी हो कभी इरम ने नहीं कहा मैं काफी समय बाद यहां आई हूं और किसी के पास समय नहीं है मुझे घुमाने के लिए क्योंकि अभी अभी सेटल हुए हैं कोई नहीं मैं दिखाऊंगा आपको कश्मीर जन्नत अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो इरम खुश होते हो उससे बोलती है एकदम ठीक है कल चलते हैं फिर घूमते घूमते उनकी दोस्ती आगे बढ़ गई अब रोज रात में छत पर मिलते रहे और ना जान

रोमांचक रहस्य – सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानियां, horror stories in Hindi

काव्य दोस्ती प्यार में बदल गई लेकिन उन दोनों की फैमिली भी एक दूसरे के बहुत करीब होते गए और आसपास के लोगों को भी लगने लगा इनके बीच कुछ चल रहा है यह बातें उन दोनों के माता-पिता के कानों तक पहुंच गई लेकिन इन दोनों ने मना लिया और अब उन्हें कोई भी दिक्कत नहीं थी इसलिए देते सब सही चल रहा था कि अचानक दोनों के पिता के बीच कुछ बात हो गई और वह बात इतनी बढ़ गई कि जिससे वो दोनों के बीच भी वह गलतफहमियां बढ़ गई और सलीम ने फौरन बोला दूर हो जाओ मेरी नजरों से और गुस्से में इरम ने अपने आप को आग लगा ली लेकिन जैसे तैसे परिवार वाले हॉस्पिटल लेकर गए थे उसकी हालत बहुत खराब हो रखी थी वह तड़प रही थी लेकिन वह बस उस तड़प में भी

सलीम को याद कर रही थी और बार-बार पूछ रही थी सलीम आया उसे पता है मेरे बारे में मैं हूं उसकी मां ने बोला उन्हें बधाई और तुम्हारे पिता को भी भेजा है सलीम को लाने के लिए कुछ देर बाद पिता के आने पर इरम ने पूछा तो नहीं आएगा पिता ने कहा उसने मना कर दिया मेरी बेटी इरम ने कहा नहीं ऐसा नहीं हो सकता वह मुझसे प्यार करता है ऐसा नहीं हो सकता बोलते बोलते उसकी सांसें रुक गई और वह मर गई सब मादा में जा चुका था और सलीम को उसके मामा के पास भेज दिया गया था और फिर 8 दिन बाद इरम फिर नजर आए

इरम की ज़िंदगी का आखिरी सफर, bhutiya kahani

अपने पड़ोसियों को उसने पूछा बस की तालीम कहां है मैं उसे नहीं छोडूंगी मेरी हालत का कारण वही है भोपाल से डरी हुई थी और दरियाबाद में बोले वह अपने मामा के यहां गया हुआ है कि तभी वहां से गायब हो गए और अगली रात सलीम अपने कमरे में जाकर बस लेटा ही था और आंखें बंद ही की थी कि तभी उसे उसके दरवाजे के पास खड़ी जलती हुई लाश भयानक चेहरा आंखों से बहता खून और वह कुत्ते से घूरती हुई दिखाई दी तभी डर के मारे उसकी आंखें खुल गई बहुत ही डर चुका था उसने दरवाजे की ओर देखा तो कोई नहीं था वह सोचने लगा मेरा सपना होगा लेकिन फिर भी उसकी आंखें बंद

तोते वह उसके बगल में बैठी हुई दिखाई दी बॉर्डर कर फिर उठ गया और चारों ओर देखने लगा फिर उसने दोबारा कोशिश की तो नहीं कि अब वह भयानक जली हुई लाश उसके ठीक ऊपर बैठी थी अब वह ठीक कर बोल रही थी तुमने ऐसा क्यों किया सलीमा आखिर क्यों और गला दबाने लगी वह बहुत तेज चिल्लाया और झटपट आने लगा कि तभी उसकी आंखें खोली और उसके मामा मामी भी उसकी आवाज सुनकर उसके कमरे में पहुंच गए थे उसने उन्हें यह सब बताया तो उसके मामा ने कहा यह सब तुम्हारे सिर्फ एक बहन है बस सो जाओ

अगले दिन सुबह वह फैक्ट्री निकल गया अपने मामा के साथ और काम करते करते उसका हाथ फैक्ट्री की मशीन के आने ही वाला था कि उसके मामा ने बचा लिया और बोला ध्यान कहां है तुम्हारा और उन्होंने देखा उसकी आंखें एकदम लाल हो रखी थी जैसे बिल्कुल सोया ही ना हो सलीम ने कहा मां मुझे बहुत तेज नींद आ रही है लेकिन मैं सुन नहीं पा रहा रात से मुझे बस उठा रामनिवास पूरी तरह जली हुई लाश दिखाई दे रही है जब जब आंखें बंद करता हूं वही दिखाई देती है मैं क्या करूं उसके मामा ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया सोचा वह होगा इसकी शादी जल्द से जल्द करनी होगी वरना यह ऐसे ही अकेले रहते रहते पागल हो जाएगा लेकिन उस रात

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इरम की ज़िंदगी का आखिरी सफर, bhutiya kahani


जब सलीम फिर से सोने की कोशिश में था तब अचानक उसके कानों में धीरे से आवाज आई सलीम यहां आओ सलीम को वह आवाज उसके कानों में मानव जैसे बस गई हो वह पागल सा हो गया था वह समाज का पीछा करने लगा और उस आवास का पीछा करते-करते वह कब घर से बाहर चला गया उसे खुद पता नहीं चला वह समाज को ढूंढने के पीछे इतना पागल हो गया था कि उसे यह भी नहीं पता था कि वह किस ओर जा रहा है धीरे-धीरे वह सड़क के बीचो-बीच चलता हुआ जा रहा था कौन है तू कहां है तू बोल कौन है वह वाज उस ठंड में रोड की दूसरी और एक खेल के पास जा रही थी वहां कोई खड़ा हुआ था उसे सलीम जैसे ही वहां गया और पूछा कौन हो तुम

बताओ कि तभी उस सन्नाटे को चीरते हुए एक भयानक कि वह पलटी सलीम उसको देखकर वह डर कर गिर पड़ा और उसने देखा कि वह राम थी लेकिन उसका पूरा शरीर जला हुआ था इरम ने कहा मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी सलीम सलीम डर के मारे घर की ओर भागने लगा बुरा हाथ जैसे भयानक होती जा रही थी चारों और डर ही डर महसूस कर रहा था सलीम सलीम जैसे ही घर के बाहर पहुंचा वह मामा कहकर चिल्लाने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसके मुंह से मानो कुछ आवाज नहीं निकल पा रही थी जैसे-जैसे राम करीब आती गई वैसे-वैसे सलीम गडर बढ़ता चला गया और राम के उसके शरीर पर कब्जा कर लिया ताकि उसके अंदर ही अंदर खोखला कर

उसकी जान ले सके और अगले ही सुबह उसके मामा को सलीम घर के बाहर बहुत जख्मी हालत में पड़ा हुआ मिला उसे अस्पताल लेकर गए तूने पता चला कि उसकी एक किडनी फेल हो चुकी है और भी बहुत कुछ उसके मामा को देखने को मिला कि वह हर समय कुछ ना कुछ बड़बड़ा रहा था आंखें बंद करके किसी से कुछ नहीं बोलता और रात होते ही थी कि एक बस्ती वह पूरी तरह तड़प रहा था बुरी तरह दर्द में जिस तरह आज भी हो धीरे-धीरे मौत की और ऐसे ही बढ़ता जा रहा है लेकिन कोई कुछ नहीं कर पा रहा है तो मैं हूं विशाल और यह आज की एक सच्ची घटना

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