जादुई तालाब की देवी Goddess Magical Pond Hindi Kahani

By | August 5, 2020
जादुई तालाब की देवी Goddess of Magical Pond Hindi Kahani
Stories in Hindi for kids

जादुई तालाब की देवी Goddess of Magical Pond Hindi Kahani | Moral Stories Kahani Magical

रामपुर नाम के गांव में अमरपाल नाम का एक लकड़हारा रहता था वह अपने दो बेटे सोनू और मोनू के साथ रहता था दोनों बहुत ही दयालु स्वभाव का था Goddess of Magical Pond Hindi Kahani वह अपने पिता के सारे कामों में मदद किया करता था पर मोनू उसके विपरीत आलसी और लालची स्वभाव का था 1 दिन की बात है अमरपाल अपने छोटे बेटे मोनू को बुलाकर कहता है !

मोनू अब मैं बूढ़ा हो चुका हूं और तुम भी बड़े हो गए हो अपने बड़े भाई दोनों के काम में मदद किया करो कुछ जिम्मेदारियां तुम भी लिया करो मोनू कहता है पिताजी आप फिजूल की बातें कहने के लिए मुझे बुलाया मैं इन सब कामों के लिए नहीं बना हूं अब मैं चलता हूं मेरे दोस्त इंतजार कर रहे होंगे पिताजी को मोनू की बातें सुनकर बहुत बुरा लगा और चिंता भी होने लगी कुछ दिनों बाद अमरपाल की तबीयत खराब हो जाती है वह बिस्तर पकड़ लेता है !

सारे काम का भाड़ बड़े बेटे सोनू पर आ जाता है सोनू अपने पिता का ध्यान भी रखता था और जंगल से लकड़ियां काटकर बाजार में भेजता भी था बद किस्मती से अमरपाल गुजर जाते हैं अब सोनू को घर और बाहर दोनों जगह काम करना पड़ता था कारोबार की ज्यादा जानकारी नहीं होने की वजह से आमदनी भी कम होते थे एक शाम सोनू बाजार से लकड़ियां बेच कर थक गया था वह मोनू से कहता है!

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आज तुम क्यों नहीं खाना बना देते मुझे बहुत थकान लग रही है मोनू कहता है तुम पागल तो नहीं हो गए हो मुझसे खाना नहीं बनेगा कुछ फल है मैं वही खा लूंगा तुम अपना देख लो सोनू को बहुत बुरा लगता है वह बिना कुछ खाए सो जाता है अगली सुबह थकान और भूखे पेट सोने की वजह से सुनो को बुखार आ जाता है वह मोनू से कहता है आज तुम भी बाजार जाकर लकड़िया बेच कर आ जाओ मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही और घर पर भी कुछ खाने के लिए नहीं है मोनू कहता है !

मैंने तुमसे पहले ही कहा मैं काम करने के लिए नहीं बना हूं मैं अपने दोस्तों के घर जा रहा हूं वही खा लूंगा तुम अपना सोचो सोनू को मोनू की इस व्यवहार से बहुत परेशानी होती है थोड़ी देर बाद लड़खड़ाते हुए उठता है और उसी हालत में जंगल से लकड़ियां काटने के लिए जाता है वहां पहुंचकर वह उदास होकर रोने लगता है तभी उसे एक आवाज सुनाई देती है !

क्या हुआ सोनू तुम इतना परेशान क्यों हो सोनू पूछता है कौन बोला तभी तलाक से एक देवी प्रकट होती है और आवाज आती है मैं हूं जादुई तालाब की देवी मैं रोज तुम्हें लकड़ियां काटकर बाजार लेकर जाते देखती हूं तुम बहुत मेहनती हो बिल्कुल अपने पिताजी की तरह आज इतने परेशान क्यों हो सोनू कहता है मैं अपने भाई मोनू के व्यवहार से बहुत परेशान हूं उसे जिम्मेदारियों का कोई एहसास नहीं है पिताजी के जाने के बाद ऐसा लगता है !

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जीवन में कोई खुशी ही नहीं बचे जादुई तालाब की देवी कहती है सोनू तुम परेशान मत हो मेरे पास एक उपाय है तुम वह घर छोड़कर दूसरे घर में रहने चले जाओ तुम्हारे भाई को तभी सबक मिलेगा सोनू कैसा है हमारा एक ही घर है बहुत मुश्किल से तो मैं खाने के लिए दो टाइम का कमा कर ला पाता हूं जादुई तालाब की देवी कहती है मैं सब जानती हूं तुम घर जाओ तुम्हारे घर के पास तुम्हें रहने के लिए एक दूसरा घर मिलेगा उस घर में साल भर के खाने का सामान और जरूरत के बाकी सभी चीजें होंगे तुम अपने भाई से जिम्मेदारियां बांटने को कहना अगर वह नहीं मानता तो तुम वह घर छोड़कर अपने घर में चले जाना सोनू कहता है !

जी मैं ऐसा ही करूंगा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सोनू जब अपने घर के पास पहुंचता है तो देखता है उसके घर के पास वाली जमीन पर एक नया घर बना है वह समझ जाता है कि यह सब जादुई तालाब की देवी ने किया है सोनू अपने पुराने घर आकर सोनू कहता है मैं तबीयत खराब होने के बाद भी काम पर गया और तुमने कुछ खाने के लिए नहीं बनाया मैं अकेली सारी जिम्मेदारियां कैसे संभाल पाऊंगा तुम मेरी कुछ तो मदद करो मोनू कहता है !

मैं तुमसे पहले ही कह चुका हूं यह काम की बातें मुझसे मत कहा करो तुम बड़े हो जिम्मेदारियां तुम ही संभालो सोनू कहता है अगर ऐसा है तो मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना तुम मेरे घर से चले जाओ मोनू कहता है मैं क्यों जाऊं इस घर से यह मेरे पिताजी का घर है जाना है तो तुम जाओ तुम्हें मेरे साथ नहीं रहना सोनू चुपचाप घर से चला जाता है !

नया घर में आकर सोनू देखता है कि वहां साल भर के खाने का सामान था और बाकी सारी सुख सुविधाएं थी वह खिड़की से बाहर अपने पुराने घर में मोनू को देखने लगता है और उस पर नजर रखने लगता है कुछ दिनों बाद वह देखता है मोनू उदास रहने लगा है और स्वयं ही अपना सारा काम करने लगा है !

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सोनू मन ही मन जादुई तालाब की देवी को धन्यवाद करता है अगली सुबह मोनू सोनू के घर आता है और कहता है मुझे माफ कर दो मैं अपनी जिम्मेदारियों नहीं समझ पाया और तुम ही अकेले सारा काम करने को कहता था पर अब मैं सब समझ गया हूं और काफी बदल भी गया हूं क्या हम वापस से साथ में अपने घर में नहीं रह सकते सोनू कहता है !

मुझे तुम्हारे स्वभाव में बदलाव देख कर बहुत खुशी हुई क्यों नहीं भाई तो मेरे साथ इस नए घर में रह सकते हो हम दोनों साथ मिलकर काम करेंगे और सुखी जीवन जी लेंगे दोनों भाई खुशी-खुशी साथ में रहने लगे और अब मनोहर काम में सोनू की मदद भी करने लगा था दोस्तों हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थिति में भी अगर हम सूझबूझ से काम ले तो हर मुश्किल का उपाय है और भाईचारे के साथ रहने में ही सुखी और शांति का जीवन मिलता है धन्यवाद

दोस्तों अगर कहनी के शि लगी फीडबैक हमारे कमेंट सेक्शन में दें !!

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