बेस्ट 5 ghost stories | horror stories | amityville horror



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बेस्ट 5 ghost stories | horror stories | amityville horror
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खंडहर: horror stories, amityville horror, bhoot ki film, scary story

(horror stories) बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज का स्टूडेंट था अपने कॉलेज की ओर से हम सभी कैम्प के लिए एक जंगल में गए थे हलकी ठंढ थी अत रात में हम सबने पूरी रात कैम्प फायर के साथ डांस करने गाने आदि का प्रोग्राम तय किया मुझे और सभी साथियों को कैम्प फायर के लिए लकडियाँ इकट्ठी करने का भार सौंपा गया|

मैं निकला तो सबके साथ ही लेकिन जंगल के प्राकृतिक सौन्दर्य में भटकता हुआ अकेले बहुत दूर कहीं निकल गया अचानक आसमान बादलों से भर गया और (bhoot ki film) गरज के साथ बारिश होने लगी बादलों के लगातार गरजने से मैं पेड़ के नीचे खड़ा रहना मुनासिब न समझ आसपास किसी घर की तलाश में एक दिशा में भागने लगा |

मुझे कुछ ही दूरी पर एक लाल ईंटों से बनी शानदार बिल्डिंग नजर आई बिल्डिंग रोशनी से पूरी नहाई हुई थी और उसमें ढेर सारे लोग हैं horror stories ऐसा दूर से ही लग रहा था मैं तेजी से भागते हुए उस बिल्डिंग में जा घुसा और सामने से आती हुई एक खुबसूरत नर्स से टकराते टकराते बचा|

नर्स ने मुझे घूर कर देखते हुए कहा बहुत अधिक भीग गए हो सर्दी लग जायेगी उधर बाईं ओर एक स्टोर रूम है वहां जाकर जो भी मिले उससे कहना सिस्टर जूलिया ने दुसरे सूखे और साफ़ कपडे मुझे देने को कहा है वह तुम्हे कपडे दे देगा|

मैं हक्का बक्का मुंह फाड़े सिस्टर जूलिया को देखता रहा मुझे एकदम से यह समझ नहीं आया कि मैं क्या करूँ मेरी स्थिति देखकर सिस्टर जूलिया खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली पहले तो तुम अपना मुंह बंद करो वरना मुंह में मच्छड घुस जायेंगे और अब जाकर वीसा ही करो जैसा मैं ने कहा है|

(horror stories in Hindi) मैं हलके से हाँ में सर हिला सिस्टर की बताई दिशा में जाने को मुद गया अ कुछेक दस कदम ही चला होउंगा कि मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा मैं चौंककर पीछे मुदा और अपने सामने आर्मी की वर्दी में एक युवक को खडा मुस्कुराता पाया|

मेरे चेहरे पर आश्चर्य का बादल अपना घर बना चुका था जिसे देखते ही उस युवक को हंसी आ गई उसने धीमे किन्तु दृढ स्वर में कहा मैं कैप्टन विनोद हूँ और यह हमारे देश की आर्मी का हॉस्पिटल है कैप्टन विनोद की बातों ने मुझे आश्वस्त किया|

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मैं अब धीरे - धीरे सामान्य हो गया और मैं ने कैप्टन विनोद को सिस्टर जूलिया की कही बातें बताई|सुनकर ,कैप्टन विनोद के चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान फ़ैल गई और वे बोले - तो सिसितर जूलिया से भी मिल चुके |

जी क्या मतलब है आपका कुछ नहीं चलो मैं तुम्हे सूखे कपडे देता हूँ चेंज कर लो नहीं तो सच में सर्दी लग जायेगी और मैं कैप्टन विनोद के पीछे - पीछे एक बड़े से कमरे में पहुँच गया कमरे के चारो ओर हरे रंग के परदे लगे हुए थे |

एक ओर एक बड़ा सा बेड पडा horror stories हुआ था और उसके सामने एक सोफा था बीच में एक टेबल था जिस पर दो ग्लास एक बड़ी बोतल ब्रांडी की और एक या दो पत्रिकाएं पड़ी हुई थीं कमरे के एक कोने में एक बड़ी सी अलमारी थी जिसमें से कैप्टन विनोद ने एक आसमानी रंग का कुरता - पायजामा निकालकर मुझे दिया और कमरे से लगे बाथरूम की ओर इशारा किया |

मैं बाथरूम से कपडे चेंज कर जैसे ही निकलने लगा मेरी नजर बाथरूम की एक दीवाल पर पड़ी वह खून के छींटों से भारी हुई थी यह देखकर मैं घबडा गया और जल्दी से बाहर निकलने को मुदा कि बाथरूम में लगे आईने में खुद को ही देखकर चौंक गया|

(horror stories in Hindi) आईने में मेरा पूरा शरीर तो नजर आ रहा था लेकिन मेरे शरीर पर से मेरा सर गायब था अब मुझे डर लगने लगा और मैं हडबडा कर बाथरूम से निकल गया मुझे इस तरह बाहर निकलते देख कैप्टन विनोद ने हंसकर पूछा horror stories क्या हुआ अरे हाँ तुम ने तो अब तक मुझे अपना नाम ही नहीं बताया कहाँ जाओगे बाहर बहुत तेज बारिश हो रही है लेकिन तुम जाना क्यों चाहने लगे अचानक यह मैं समझ नहीं पा रहा हूँ |

कैप्टन विनोद आपकी बाथरूम की एक दीवाल पूरी खून के छींटों से भरी हुई है और और आपके बाथरूम में लगा आईना भी कुछ अजीब सा है उसमें मुझे मेरा पूरा शरीर तो दिखाई दिया लेकिन मेरा सर ही गायब था मैं अब बिलकुल भी नहीं रुकुंगा यहाँ बारिश में ही भीगता हुआ अपने कैम्प तक जाऊँगा |

कहते हुए मैं कमरे से बाहर जाने वाले दरवाजे की ओर बढ़ा रुको तभी कैप्टन विनोद की कडकती आवाज गूंजी तो तुमने सबकुछ देख ही लिया जी क्या मतलब है आपका मेरी आवाज में डर भर गया था मतलब चाहे जो हो तुम तब तक यहाँ से नहीं जा सकते जबतक मैं तुम्हे कुछ बता न - दूं - क्क्कक्या बताना चाहते हैं आप जो आजतक कोई न जान सका |

जो आज तक कोई न जान सका वह मैं जानकार क्या करूंगा प्लीज अब मुझे जाने दें- मैं डर से रुआंसा हो गया नहीं बिलकुल भी नहीं और तुम्हे मुझसे डरने की भी कोई जरुरत नहीं सैनिक सबकी रक्षा के लिए होते हैं मैं भी तुम्हारी सुरक्षा ही कर रहा हूँ कैप्टन विनोद के स्वर में कोमलता थी आओ मेरे साथ इस सोफे पर बैठ जाओ|

मैं तुम्हे एक कहानी सुनाता हूँ कहानी खत्म होते ही मैं तुम्हे तुम्हारे कैम्प तक जीप से छोड़ आऊंगा वैसे भी तुम अपने साथियों से काफी आगे निकल आये हो वहां तक तुम अब चलते हुए शायद पहुँच न पाओ कैप्टन विनोद के स्वर में जाने कैसी आश्वस्ति थी मैं जाकर उनके बगल में बैठ गया |

कैप्टन विनोद ने कहना शुरू किया – दुश्मनों ने धोखे से हमारे अस्पताल को अपना निशाना बनाया दुश्मन देश के दो सैनिक हमारे सैनिक के वेश में एक हमारे ही घायल सैनिक को लेकर आये वह घायल था और और हमारे देश की सेना ने उसे बहुत ढूंढा लेकिन नहीं मिला था शायद साजिश के तहत उसे घायल होते ही घुसपैठियों ने कहीं छुपा दिया था|

अचानक अपने खोये सैनिक को अपने हॉस्पिटल में पा सभी खुश हो गए और बिना अधिक पड़ताल किये हॉस्पिटल के गेस्ट रूम में घायल को लेकर आने वाले छद्म वेष धारियों को ठहरने की इजाजत दे दी गई अभी उस सैनिक का इलाज चल ही रहा था कि जोरों का ब्लास्ट हुआ और पूरा हॉस्पिटल एक पल में खंडहर में तब्दील हो गया |

(horror story in Hindi) लेकिन हॉस्पिटल तो अपनी शानदार स्थिति में खडा है  मेरी बातों को अनसुना कर कैप्टन विनोद ने अपनी बात जारी रखी – कोई नहीं बचा उस ब्लास्ट में दीवाल पर पड़े खून के छींटे भी उसी ब्लास्ट में मारे गए होपितल के कर्मचारियों के हैं हाँ पर यह होस्पीटल तो मुझे खंडहर नहीं दिखता |

जवाब में कैप्टन विनोद के चेहरे पर रहस्य भरी मुस्कान फ़ैल गई और उनका चेरा अजीब से भावों से भर गया मैं उनके चेहरे को देखकर अन्दर से दहल गया फिर भी मैं ने हिम्मत कर पूछा – आप उस ब्लास्ट में बाख कैसे गए  सुनते ही कैप्टन विनोद ठहाका लगा कर हंस पड़े और मुझ पर एक भरपूर नजर डालते हुए कहा – यह कहानी आज से मात्र दस वर्ष पहले की है और मैं तो आज से पचास वर्ष पहले मर चुका हूँ |

इसके आगे उनहोंने क्या कहा – मुझे कुछ नहीं मालुम|, चेहरे पर गीलेपन का अहसास जब काफी हुआ तो मैं जैसे नींद से जागा मुझे घेरे हुए मेरे सभी सहपाठी और टीचर खड़े थे| मेरे आँख खोलते ही मेरे सर ने कहा – थैंक गॉड तुम्हे होश आ गया तो क्या मैं बेहोश था तुन जंगल में जाने कहाँ भटक गए थे जब सभी लौट आये और तुम नहीं आये तो हम सभी मिलकर तुम्हें ढूँढने निकले |

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काफी दूर जाने के बाद हमने एक जीप आती दिखाई दी जिसमें एक आर्मी मैन तुम्हे पीछे की सीट पर सुलाए हुए हमारे कैम्प को ढूंढते हुए आ रहे थे उनहोंने हम सबको भी अपनी जीप पर बिठाया और कैम्प तक्ल छोड़ा हमने उन्हें काफी रोकने की कोशिश की लेकिन वे यह कहते हुए चले गए अभी नहीं रुक सकता एक जरुरी काम है|

जब हमने तुम्हारे बेहोश जाने और उन तक तुम्हारे पहुँचने के बारे में पूछा तो बोले – सोमेश ही बताएगा और जो भी बताएगा वह सब अक्षरश: सच होगा| सबकी उत्सुक निगाहें अपनी ओर लगी देख मैं ने धीमे स्वर में पूछा amityville horror क्या उनका नाम कैप्टन विनोद था सर ने “ हाँ “ में सर हिलाया |

(Horror Story in Hindi) मैं ने सबको उधर चलने को कहा जिधर से सबने जीप आती देखी थी पहले तो सर तैयार नहीं हुए लेकिन मेरे बहुत कहने पर वे राजी हो गए सुबह होते ही हम उधर की ओर गए  मैं उस जगह पर पहुँच कर गहरे आश्चर्य में डूब गया| वहां एक अधजला खंडहर था जिसके एक टूटे पत्थर पर लिखा था “ आर्मी हॉस्पिटल |

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दरवाजा खोलो #2 best 5 ghost stories | horror stories | amityville horror, scary story

शाम ढल रही थी आसमान पुरा काला पड चुका था जैसे किसी ने काले रंग की शीशी उडेल दि हो शायद बारिश आने को बेकरार है |

 घिरा हुआ आसमान और ठंडी हवाये चाँदनी को बेहद पसंद थी बारिश चाँदनी के बदन में एक अजब सी सिहरन पैदा करती थी |

चाँदनी आईने के सामने पिछले आधे घंटे से बन-सवर रही थी बन-सवर क्या सजने की रिहर्सल कर रही थी |

तीन बार तो साडीयाँ चेन्ज कर चुकी थी चाँदनी को साज-श्रुंगार का बहुत शौक था आज उसे मिसीस कपूर की बेटी की शादी में जाना था |

चाँदनी कॉलेज की अध्यापक थी मगर दिखती कॉलेज स्टुडन्ट जैसी वो हमेशा खूबसूरत दिखना और खूबसूरत रहना चाहती थी |

चाँदनी अब तैयार होकर रवाना हि हो रही थी उसके नजर अखबार पर पड़ी उसमें कोई भैरव चौक की खबर थी |

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लिखा था की भैरव चौक नाम के एक छोटे से इलाके में बहुत सारी अजीबो-गरीब घटनाएं घटी है |

कितनी वारदातें हुई है लूट-मार, हत्या, अपहरण, बलात्कार, भूत-प्रेत का साया, सभी घटनाएं वही तो घटी है लोग वहाँ दिन के उजाले में भी जाने का साहस नहीं करते थे |

ये खबर पढते ही थोडे समय पहले चाँदनी का चमकता चहेरा फिका पड गया उसके चहरे पर मानो हलका खौफ मंडरा रहा हो !

थोडी देर वो खामोश होकर वही खडी रही मानो ये खबर उसके मन में घर कर गई हो चाँदनी की खामोशी मिसीस कपूर के फोन ने तोडी |

चाँदनी ने फोन उठाया और बातें करते वहाँ से कार में निकल गई चाँदनी को शादी में पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं आई |

चाँदनी ने गाडी से बाहर निकलने से पहले एक बार फिर अपना चेहरा निखार लिया था चाँदनी का स्वागत हँसते चहेरो ने किया |

मगर कुछ चहेरे ऐसे भी थे जिसने चाँदनी को बुरी नियत से देखा वो चहेरे थे कॉलेज के बदमाश और कॉलेज ट्रस्टी के बीगडे हुए लडके

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कॉलेज ऊन लडको को पाँच पापी बुलाती थी लडकीयो को छेड़ना, लडकीयो के साथ बद-तमीजी करना, लड़ना-झघडना

वो सब उन पांचो को काम था इसलिए कॉलेज उसे पाँच पापी बुलाती थी खैर चाँदनी भी उनकी हरकतों को भलीभाती जानती थी

इसलिए उसको अनदेखा करके शादी में शामिल हो गई नाच-गाना, खाना-पीना, गप्पे लडाने और बिदाई में पता हि नहीं चला के |

रात के 11 बज गये है उसे घर पहुँचने में अभी उसे 2 घंटो का फासला तय करना था चाँदनी के पति जतीन का फ़ोन आता था |

हेल्लो चाँदनी कहा हो – जतीन ने कहा ‘में शादी में आई थी पर बहुत देर हो गई है बस मिसीस माथुर के साथ अब निकल ही रही हुं’ – चाँदनी ने बातें खतम करके फोन रखा |

चाँदनी ने फटाफट से मिसीस कपुर बाय किया और मिसीस माथुर को ढुंढने लगी मगर पता चला की मिसीस माथुर तो घर के लिए कब की रवाना हो चुकी है |

 चाँदनी सोचने लगती है की अब अकेली घर कैसे जायेगी तभी अचानक से तेज बिजली कडकी .सायद थोडे समय के बाद बारिश होने वाली है

उसने किसी परवा करे बिना वहाँ से अकेली निकल पड़ी मगर वो पाँच पापी चाँदनी की हर हरकत नजर रखे हुए थे |

चाँदनी ने बस थोड़ा सा हि फासला तय किया हि था की बारिश की बुंदाबारी आने लगी चाँदनी मन हि मन सोच रही थी की वो बारिश बंद होने का इन्तजार करे या फीर आगे बढे

चाँदनी को जल्द हि तय करना था उसे क्या करना है उसने आगे बढ़ने का फैसला किया चाँदनी की कार थोडी आगे बढी ही थी की तेज बारिश शरु हो गई हमेशा चाँदनी को सिहरन देने वाली बारिश की बुंदे आज बाधा बन रही थी scary story

चाँदनी बारिश की बुंदोबारी को चीरती आगे बढ़ रही थी चाँदनी का आगे बढ़ने का फैसला सही था क्योंकि बारिश बंद हो चुकी थी |

चाँदनी हलके मन से ड्राईव कर रही थी मगर .लगता है आज का दिन चाँदनी के लिए सच-मुच भारी था क्योंकि सामने ट्राफीक जाम था |

गाडीयों की लम्बी लाईन लगी थी किसी से पूछा तो पता चला की भारी बारिश के चलते आगे का रास्ता पुरा ब्लॉक हो चुका है |

जब तक रास्ता साफ नहीं होगा तब तक ट्राफिक जाम रहेगा और रास्ता साफ होने में सुबह भी हो सकती है |

सुबह का नाम सुनते हि चाँदनी की हवाईयाँ उड लगी तभी चाँदनी देखती है की कुछ गाडीया कच्ची सड़क की तरफ़ जा रही है |

 भैया ये कच्ची सड़क कहा जाती है – चाँदनी ने किसी से पुछा ‘ये कच्ची सड़क शहर जाती है बहन जी’

 चाँदनी फिर से सोचने लगी की वो रास्ता खुलने का इन्तजार करे या फिर कच्चे रास्ते से जाये

उसने सोचा की वो कब तक अकेली रास्ता साफ होने का इन्तजार करेंगी वो भी कच्ची सड़क की तरफ़ जा रही गाडियां के साथ गाडी चला कर शहर वाले रास्ते जा सकती है,

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इसलिए उसने वो कच्ची सड़क से घर जाने का फैसला किया चाँदनी आगे बढ़ तो रही थी मगर खौफ़ अभी भी उसके सीर पर डर मंडरा रहा था

क्योंकि वो आगे चल रही गाडियां के सहारे जा रही थी जैसे कोई दीपक की रोशनी लेकर अंधेरे से गुजर रहा हो आगे चल गाडीयो की रफ्तार तेज होती है वो सब चाँदनी की कार से आगे बढ़ जाती है |

इतनी बढ जाती है की वो सब कारे हेडलाईट के सहारे देखी जा सकती थी चाँदनी भी उन तक पहुंचने के लिए अपनी गाडी की स्पीड बढाती है मगर ..गाडी अचानक से बंद हो जाती है |

 गाडी बंद होते हि चाँदनी बदहवास सी हो जाती है वो वहाँ अकेली थी आगे पीछे कोई नहीं था आगे जाती गाडीयाँ एक के बाद एक आंखो से ओझल हो रही थी चाँदनी अब बेचेन सी होने लगी थी धडकने तेज चल रही थी |

उसके माथे से डर की बुंदे एक के बाद टपकने लगी थी उसके आंखो में खौफ साफ़ दिख रहा था वो गभराके जोर-जोर से सांसे ले रही थी |

उसने अपने पर्स से फोन निकाला और जतीन का नंबर डायल करने लगी मगर वहाँ मोबाइल कनेशन के नाम पर कुछ नहीं था |

वो इतना डर गई थी की वो गाडी से बाहर निकलना भी नहीं चाहती थी उसे कुछ सूझ नहीं था बस गाडी स्टार्ट करने में लगी थी

वो बार बार चाबी को डाए-बाए घुमा रही थी मगर नतिजा वही गाडी स्टार्ट नहीं हो रही थी अचानक से चाँदनी की नजर उसके पर्स में जाती है |

और उसमें एक तवीज दिखता है वो तवीज जो चाँदनी की माँ ने आखरी सांस लेते वक्त दिया था और कहा था की 'ये तवीज बुरे वक्त में तुम्हारी हिफाजत करेगा' |

चाँदनी ने तुरंत तवीज लिया और आँखें बंद करके फ़िर से गाडी स्टार्ट करने की कोशिश करने लगी माँ का दिया तवीज काम कर गया था गाडी एक झटके में स्टार्ट हो गई थी चाँदनी के तो जान में जान आई हो ऐसे राहत की सांस ली |

चाँदनी तवीज की शक्ती (scary story) से अचंभित हो गई वह समय व्यर्थ किये बिना वहाँ से चल दी चाँदनी एकादा किलोमीटर का रास्ता काटा था वहाँ उसे एक बोर्ड दिखता है उसे बोर्ड पे लिखा था .भैरव चौक !

भैरव चौक नाम पढते ही रौगटें खड़े हो गये और आँखें खुली की खुली रह गई उसकी सांसे फिर से तेज रफ्तार से बढ़ने लगी वही भैरव चौक जिसके बारे चाँदनी्ने पढा था जहाँ पर खुन, बलात्कार जैसे वारदातें हुई थी |

उसने फ़िर से तवीज को हाथ में थामा और एक पल के लिए आँखें बंद की जैसे वो भगवान से दुआ मांग रही हो के अब की बार गाडी बंद ना हो  मगर . ये क्या चाँदनी की कार भैरव चौक के नाम के बोर्ड के ठिक सामने आ कर रुक गई |

चाँदनी ने बाहर का नजारा देखा तो वो बेहद अँधेरा और डरावना था जुगनु की टमटमाटी रोशनी के सीवाँ कुछ दिखाई नहीं दे रहा था |

चाँदनी ने फिर से तवीज उठाया और आँखें बंद कर के भगवान का नाम लेती हुई गाडी स्टार्ट करने में जुट गई |

गाडी के चाबी को डाई-बाई घुमाकर उसकी उंगलीया तक थक गई थी मगर अब की बार गाडी शुरू होने का नाम ही नहीं ले रही थी |

एक दो बार फोन भी लगाया मगर वहाँ भी उसे नाकामीयबी मिली वो इतनी डरी हुई थी की गाडी से बाहर निकलने में भी उसके पैर कांप रहे थे |

तभी .उसे सामने कुछ दिखा सामने से सफेद रंग की कुछ धुंधली-धुंधली आकृति आ रही थी चाँदनी उसे देख दहल गई और बदन में कंपकंपी होने लगी वो आकृति जैसे-जैसे आगे आ रही थी वैसे-वैसे एक आकृति से तीन आकृतियाँ हो गई थी |

काले घने अंधेरे में सफेद रंग साफ-साफ दिख रहा था चाँदनी उसे देख बस सोच रही थी ये क्या आ रहा है सफेद चादर ओढे कोई आदमी |

या फ़िर कोई भूत-प्रेत.. चाँदनी के पसीने छुटने लगे थे चाँदनी ने जल्दी से गाडी के शीशे बंद है की नही ये तसल्ली कर ली और वहाँ बैठे-बैठे तवीज को थामे आंखे बंद करके भगवान का नाम जपने लगी |

अब वो आकृतियाँ चाँदनी के गाडी के आगे पीछे मंडराने लगी थी सहमी हुई चाँदनी जोर-जोर सांसे लेकर, हलकी सी कनकियों से देख रही थी |

तभी किसी ने गाडी के शीशे पर जोरदार वार किया चाँदनी उस तरफ देखा तो मालुम पडा के वो गाडी के शीशे तोडने की कोशीश कर रहे थे |

चाँदनी गभराके जोर-जोर से चील्लाने लगी - ‘बचाओ , बचाओ’ चाँदनी चिल्लाती रही और वो शीशे पर वार करते रहे और एक शीशा तोड़ दिया |

शीशे टुटते ही चाँदनी को कही से मदद मिल जाये इसलिए वो जोर से चिल्लाने लगी - ‘बचाओ, कोई मुझे बचाओ !

किसी ने गाडी का दरवाजा खोल दिया और चाँदनी का हाथ पकद के गाडी से एक झटके में बाहर फ़ेक दिया चाँदनी गाडी से बाहर गीरकर एक पत्थर से आ टकराई चाँदनी मानो अधमरी सी हो गई थी

उसने हिम्मत जुटाई और वहाँ से उठ खड़ी हो गई तो उसने देखा के वहाँ तीन सफेद चादर ओढे तीन शख्स थे |

वो तीनो के चहरे काले, दहशतभरे और भयानक थे और सब हाथ में चक्कू लेकर खड़े थे चाँदनी समझ गई के ये सब लुटेरे है और बिना कुछ बोलें चाँदनी ने सोने-चांदी के जेवर निकालने लगी |

ये सब ले लो मगर मुझे जाने दो – चाँदनी से बिलकते हुई उन लुटेरो से कहा एक लुटेरे ने तुरंत चाँदनी के हाथों से सब जेवर छीन लिए चाँदनी अभी भी बिकल-बिलक कर बस रोये जा रही थी |

‘ये सब तो हम लेंगे ही मगर इतनी लूट काफ़ी नहीं हमारे लिए’ – एक लूटेरे ने चाँदनी के उपर हवस भरी नजर डालते कहा |

चाँदनी लूटेरो का इरादा समज गई थी और एक सांस लेकर वहाँ से भागी वो तीनो भी चाँदनी के पीछे भागे |

मगर सहमी हुई चाँदनी कितने तक भाग पाती उन तीनो भैडीये ने आखिरकार चाँदनी को पकद ही लिया ‘बचाओ . बचाओ – चाँदनी पुरी ताकत से चिल्लाई ‘यहाँ तुम्हें बचानेवाले कोई नहीं आयेगा !

चिल्लाओ जीतना चिल्लाना हो ऊतना’ – एक लुटेरे ने हँसते हुए कहा तभी एक लुटेरे पर पिछे से तेज वार होता है वो लुटेरा वही ढेर हो जाता है |

चाँदनी को एक आशा की किरण दिखाई देती है वो दोनो लुटेरे पीछे देखते है की ये वार किसने किया  चाँदनी भी उस तरफ देखती जहाँ से वार हुआ था वहाँ वो कॉलेज के पांच स्टुडन्ट होते है जीसे कॉलेज पाँच पापी कहके बुलाती थी |

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वो पाँच स्टूडन्ट बचे दो लुटेरे पर झपते है उन्हे मार मारके बेहोश कर देते है चाँदनी वहाँ सहमी खडी आंखो से आंसु बरसाती बस देखती रही थी

और सोच रही थी की जिस पाँच पापी को बुरा और गलत समज रही थी वही लोगो ने आज चाँदनी को बुरे हादसे से बचा रहे थे |

इरम की ज़िंदगी का आखिरी सफर, bhutiya kahani

‘मेडम हम बुरे है मगर इज्जत सब की करते है आप बेफ़िकर होकर जाईये ये बंटी आप को सुरक्षित घर तक छोड़ देगा और हम इन लुटेरो को पुलिस के हवाले कर देगें इन लोगो ने भूत-प्रेत के नाम पर बहुत लूट मचा रखी थी

अब पुलिस इन्हे मजा चखायेगी – एक स्टुडन्ट ने कहा ‘मुझे माफ कर देना मै तुम लोग को गलत समज नहीं थी मगर तुम |

इन से आगे चाँदनी के मुँह से एक शब्द भी निकल नहीं पाये चाँदनी के आंसु ही थे जो सारी बातें बयां कर रहे थे चाँदनी वहाँ से सुरक्षित होकर घर गई |

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भटकती रूह की सच्ची कहानी #3 horror stories, the last exorcism, two sentence horror stories

भूत-प्रेत के किस्से सुनने में बेहद रोमांचक और दिलचस्प लगते हैं लेकिन क्या हो जब यह किस्से सिर्फ किस्से ना रहकर एक हकीकत की तरह आपके सामने आएं |

आज की युवा पीढ़ी भूत और आत्माओं के होने पर विश्वास नहीं करती लेकिन जिस पर आप विश्वास नहीं करते वह असल में है ही नहीं यह तो संभव नहीं है ना. आज हम ऐसे ही भूतहा स्थान से आपका परिचय करवाने जा रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं एक आत्मा ने किया था |

जोधपुर (राजस्थान) स्थित बावड़ियों के किस्से स्थानीय लोगों में बहुत मशहूर हैं. यहां पानी की कई बावड़ियां हैं जिनमें से एक के बारे में कहा जाता है कि उसे भूत ने बनवाया था.

जोधपुर से लगभग 90 किलोमीटर दूरी पर स्थित ‘रठासी’ नाम का एक ऐतिहासिक गांव है. मारवाड़ के इतिहास पर नजर डालें तो यह ज्ञात होता है कि जब जोधपुर में रहने वाले राजपूतों की चम्पावत शाखा का विभाजन हुआ तो उनमें से अलग हुए एक दल ने कापरडा गांव में रहना शुरू किया.

लेकिन इस स्थान पर रहने वाले युवा राजपूत राजकुमारों ने गांव में साधना करने वाले साधु-महात्माओं को परेशान करना शुरू कर दिया. उन राजकुमारों से क्रोधित होकर साधुओं ने उन्हें श्राप दे दिया कि उनके आने वाली पीढ़ी इस गांव में नहीं रह पाएगी.

साधुओं के श्राप की बात जब राजकुमारों ने अपने घर में बताई तो सभी भयभीत हो गए और उस गांव को छोड़कर चले गए. इस गांव को छोड़कर वह जिस गांव में रहने के लिए गए उस गांव का का नाम है रठासी गांव. यह जोधपुर से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक ऐतिहासिक गांव है.

इस गांव में एक बावड़ी है जिसके बारे में कहा जाता है कि वह भूतों के सहयोग से बनी है अर्थात उस बावड़ी को बनाने में भूत-प्रेतों ने गांव वालों की सहायता की थी. ठाकुर जयसिंह के महल में स्थित इस बावड़ी को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.

इस बावड़ी के विषय में यह कहानी प्रचलित है कि एक बार जब ठाकुर जयसिंह घोड़े पर सवार होकर जोधपुर से रठासी गांव की ओर जा रहे थे तब रास्ते में ठाकुर साहब का घोड़ा उनके साथ-साथ चलने वाले सेवकों से पीछे छूट गया और इतने में रात हो गई.

राजा का घोड़ा काफी थक चुका था और उसे बहुत प्यास लगी थी. रास्ते में एक तालाब को देखकर ठाकुर जयसिंह अपने घोड़े को पानी पिलाने के लिए ले गए. आधी रात का समय था घोड़ा जैसे ही आगे बढ़ा राजा को एक आकृति दिखाई दी जिसने धीरे-धीरे इंसानी शरीर धारण कर लिया. राजा उसे देखकर डर गया,

उस प्रेत ने राजा को कहा कि मुझे प्यास लगी है लेकिन श्राप के कारण मैं इस कुएं का पानी नहीं पी सकता. राजा ने उस प्रेत को पानी पिलाया और राजा की दयालुता देखकर प्रेत ने उसे कहा कि वह जो भी मांगेगा वह उसे पूरी कर देगा.

राजा ने प्रेत को कहा कि वह उसके महल में एक बावड़ी का निर्माण करे और उसके राज्य को सुंदर बना दे. भूत ने राजा के आदेश को स्वीकारते हुए कहा कि वो ये कार्य प्रत्यक्ष रूप से नहीं करेगा, लेकिन दिनभर में जितना भी काम होगा वह रात के समय 100 गुना और बढ़ जाएगा. उस प्रेत ने राजा को यह राज किसी को ना बताने के लिए कहा. इस घटना के दो दिन बाद ही महल और बावड़ी की इमारतें बनने लगीं. रात में पत्थर ठोंकने की रहस्यमय आवाजें आने लगीं, दिन-प्रतिदिन निर्माण काम तेज गति से बढ़ने लगा. लेकिन रानी के जिद करने पर राजा ने यह राज रानी को बता दिया कि आखिर निर्माण इतनी जल्दी कैसे पूरा होता जा रहा है. राजा ने जैसे ही यह राज रानी को बताया सारा काम वहीं रुक गया. बावड़ी भी ज्यों की त्यों ही रह गई. इस घटना के बाद किसी ने भी उस बावड़ी को बनाने की कोशिश नहीं की.

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वैभव जो 26 साल का है उसकी अभी अभी नयी शादी हुई है और उसकी एक खूबसूरत सी बीवी भी है। ,ये दोनों हनीमून बनाने हिमाचल गए थे जहाँ उन्होंने 4 दिन गुजारे। अब उनके दिल्ली अपने घर वापस आने का समय हो गया था। दोनों अपनी गाड़ी में बैठ गए और दिल्ली के लिए चल दिए।

रात के 11 बज गए थे अब वो हिमाचल की घाटी को पार करने ही वाले थे। रोड बिलकुल सुनसान थी और गाडी बिलकुल तेज़ी में जा रही थी ।,

अचानक वैभव को अपनी गाड़ी के आगे एक औरत दिखी जिसने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। वो दूर से ही हाथ हिला कर गाडी को रोक रही थी।

उसको देख कर वैभव की बीवी ने उसे गाडी रोकने से मना कर दिया क्योंकि उसको डर था की ये कोई लूट पाट करने की चाल हो सकती है।

लेकिन वो औरत गाड़ी के सामने आगई जिससे वैभव को गाडी रोकनी पड़ी। वो औरत ज़ोर ज़ोर से दरवाज़े को पीटने लगी उसके चेहरे के हाव भाव से ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी बड़ी मुसीबत में हो।,

वैभव की बीवी ने उसे गाडी का दरवाज़ खोलने से मना कर दिया उसने कहा कि ये कोई चाल हो सकती है हमें बहार नहीं जाना चाहिए ।पर वैभव ने बोला की अगर सच में ये किसी मुसीबत में होगी तो और उसे हमारी जरुरत हो क्योंकि उसको देख कर वो अच्छे खासे घर की लग रही थी। ये बोलते ही वैभव ने गाडी का दरवाज़ा खोल दिया और बाहर आ गया।

वो औरत घबराते हुए बोली ” प्लीज, मेरी मदद करो “। वैभव ने बोला क्या हुआ है।उस औरत ने जवाब दिया की ” मेरी गाड़ी नीचे खाई में गिर कर एक पेड़ से टकरा गई है और उसमें मेरी छोटी सी बच्ची फसी हुई है। प्लीज उसको बाहर निकालो ” ,

ये सुनते ही वैभव की बीवी भी बाहर आगई और तीनों खाई की और भागे। उन्होंने देखा की वो गाडी थोड़ी नीचे एक पेड़ से टकराई हुई है। वैभव झट से नीचे की और गया। उसने देखा की पीछे वाली सीट पर एक बच्ची बैठी हैजो रो रही है। वैभव ने दरवाज़ा खोलना चाहा पर वो नहीं खुला। दरवाज़ा अटका हुआ था। उसने बोहोत कोशिश की तब जा कर वो दरवाज़ा खुला। वैभव ने उस लड़की को बहार निकाल कर अपनी गोदी में रख लिया।

पर लड़की अभी भी रोए जा रही थी और मम्मी मम्मी कर रहा थी। तभी वैभव की नज़र आगे वाली ड्राइविंग सीट पर गयी जहाँ उसे कोई बैठा हुआ लगा। लेकिन आगे वाली गाडी का शीशा धुंधला था तो साफ़ नज़र नहीं आरहा था।

उसने अपने कपडे से उसे साफ़ किया । और जो वैभव ने देखा उसे देख कर उसकी पैरो तले ज़मीन ही खिसक गई। उसको विश्वास ही नहीं हो रहा था। ,

उसने देखा की आगे वाली सीट पर और कोई नहीं उस बच्ची की माँ थी जो मदद के लिए वैभव को बुला रही थी। उसने देखा की वो औरत के माथे से खून निकल रहा है और उसकी मौत हो चुकी है।

वैभव की पत्नी ने वैभव की हालत देख कर झट से उसके पास आई और वो भी ये मंजर देख कर हैरान हो गयी ।ये देखते ही वैभव और उसकी पत्नी ने पीछे की और देखा जहाँ वो औरत खड़ी थी पर वहाँ अब कोई नहीं था।

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अच्छा भूत #5 scary stories to tell in the dark 2020, horror story in hindi, the last exorcism

कुफरी में स्कीइंग का लुफ्त उठाने और पूरा दिन मौज मस्ती करने के पश्चात कुमार, कामना, प्रशान्त और पायल शाम को शिमला की ओर बीएमडब्लू में जा रहे थे।,

सर्दियों के दिन, जनवरी का महीना, शाम के छ: बजे ही गहरी रात हो गई थी। गोल घुमावदार रास्तों में अंधकार को चीरती, पेडों के झुरमुठ के बीच कार चलती जा रही थी। सैलानी ही इस समय सडकों पर कार चलाते नजर आ रहे थे। टूरिस्ट टैक्सियां भी वापिस शिमला जा रही थी।

कुफरी की ओर इक्का दुक्का कारें ही जा रही थी। बातों के बीच चारों शिमला की ओर बढ रहे थे। लगभग आधा सफर कट गया था

कार स्टीरियो की तेज आवाज में हंसी ठिठोली करते हुए सफर का आनन्द उठाते हुए समय का पता नही चल रहा था। झटके मारते हुए कार क्यों चला रहे हो?” प्रशान्त ने झटकती हुई कार में झूलते हुए कुमार से पूछा।

प्रशान्त भाई, मैं तो कार ठीक चला रहा हूं, मालूम नही, यह अचानक से झटके क्यों खा रही है?” कुमार ने झटके खाती कार को संभालते हुए कहा।

कार को थोडा साईड करके देख लेते हैं। “हो सकता है, कि डीजल में कचरा आ गया हो, थोडी रेस दे कर देखता हूं, कि कार रिदम में आ जाए।

 कुमार ने क्लच दबाते हुए कार का ऐक्सीलेटर दबाया, लेकिन कोई खास कामयाबी नही मिली, कार झटके खाती हुई रूक गई।

 अब क्या करे?” चारों के मुख से एक साथ निकला। सभी सोचने लगे, कि काली रात के साए में कुछ भी नजर नही आ रहा था,

सोने पे सुहागा तो धुन्ध ने कर दी थी। धीरे धीरे धुन्ध बढ रही थी। ठंडक भी धीमे धीमे बढ रही थी। कार सडक की एक साईड पर खडी थी।

इक्का दुक्का कार, टैक्सी आ जा रही थी। “प्रशान्त बाहर निकल कर मदद मांगनी पडेगी। कार में बैठे रहने से कुछ नही होगा।

कार तो हम चारों का चलाना आता है, लेकिन कार के मैकेनिक गिरी में चारों फेल है। शायद कोई कार या टैक्सी से कोई मदद मिल जाए।

कह कर कुमार कार से बाहर निकला। एक ठंडे हवा के तेज झोके ने स्वागत किया। शरीर में झुरझरी सी फैल गई।

प्रशान्त भी कार से बाहर निकला। पायल और कामना कार के अंदर बैठे रहे। ठंड बहुत अधिक थी दिल्ली निवासियों कुमार और प्रशान्त की झुरझरी निकल रही थी। दोनों की हालात दयनीय होने लगी।

थोडी देर खडे रहे तो हमारी कुल्फी बन जाएगी।“ कुमार ने प्रशान्त से कहा। “ठीक कह रहे हो, लेकिन कर भी क्या सकते है।“ प्रशान्त ने जैकेट की टोपी को ठीक करते हुए कहा।

लिफ्ट मांग कर शिमला चलते है, कार को यहीं छोडते है। सुबह शिमला से मैकेनिक ले आएगें।“ कुमार ने सलाह दी।

 ठीक कहते हो।“ रात का समय था। गाडियों की आवाजाही नगण्य थी। काफी देर बाद एक कार आई।

उनको कार के बारे में कुछ नही मालूम था, वैसे भी कार में पांच सवारियां थी। कोई मदद नही मिली। दो तीन कारे और आई, लेकिन सभी में पूरी सवारियां थी, कोई लिफ्ट न दे सका। एक टैक्सी रूकी।

ड्राईवर ने कहा, जनाब मारूती, होंडा, टोएटा की कार होती तो देख लेता, यह तो बीएलडब्लू है, मेरे बस की बात नही है। एक काम कर सकते हो, टैक्सी में एक सीट खाली है, पति, पत्नी कुफरी से लौट कर शिमला जा रहे हैं।

उनसे पूछ तो, तो एक बैठ कर शिमला तक पहुंच जाऔगे। वहां से मैकेनिक लेकर ठीक करवा सकतो हो। टैक्सी में बैठे पति, पत्नी ने इजाजत दे दी।

कुमार टैक्सी में बैठ कर शिमला की ओर रवाना हुआ। प्रशान्त कार में बैठ गया। प्रशान्त पायल और कामना बातें करते हे समय व्यतीत कर रहे थे।

धुन्ध बढती जा रही थी। थोडी देर बाद प्रशान्त पेशाब करने के लिए कार से उतरा। कामना, पायल कार में बैठे बोर हो गई थी।,

मौसम का लुत्फ उठाने के लिए दोनों बाहर कार से उतरी। कपकपाने वाली ठंड थी। “कार में बैठो। बहुत ठंड है। कुल्फी जम जाएगी।“ प्रशान्त ने दोनों से कहा।

बस दो मिन्ट मौसम का लुत्फ लेने दो, फिर कार में बैठते हैं।“ पायल और कामना ने प्रशान्त को कहा। “भूतिया माहौल है। कार में बैठते है।“ प्रशान्त ने कहा।

प्रशान्त की बात सुन कर पायल खिलखिला कर हंस दी। “भूतिया माहौल नही, मुझे तो फिल्मी माहौल लग रहा है।

किसी भी फिल्म की शूटिंग के लिए परफेक्ट लोकेशन है। काली अंधेरी रात, धुन्ध के साथ सुनसान पहाडी सडक।

हीरो, हीरोइन का रोमांटिक मूड, सेनसुएस सौंग। कौन सा गीत याद आ रहा है।“ “तुम दोनों गाऔ। मेरा रोमांटिक पार्टनर तो मैकेनिक लेने गया है।“ कामना ने ठंडी आह भर कर कहा।

तीनों हंस पडे। तीनों अपनी बातों में मस्त थे। उनको मालूम ही नही पडा, कि कोई उन के पास आया है। एक शख्स जिसने केवल टीशर्ट, पैंट पहनी हुई थी, प्रशान्त के पास आ कर बोला “आपके पास क्या माचिस है?”

इतना सुन कर तीनों चौंक गए। जहां तीनों ठंड में कांप रहे थे, वही वह शख्स केवल टीशर्ट और पैंट पहने खडा था, कोई ठंड नही लग रही थी उसे।

प्रशान्त ने उसे ऊपर से नीचे तक गौर से देख कर कहा। “आपको ठंड नही लग रही क्या?” उसने प्रशान्त के इस प्रश्न का कोई उत्तर नही दिया बल्कि बात करने लगा “आप भूतिया माहौल की अभी बातें कर रहे थे।

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क्या आप भूतों में विश्वास करते हैं? क्या आपने कभी भूत देखा है?” “नही, दिल्ली में रहते है, न तो कभी देखा है और न कभी विश्वास किया है, भूतों पर।“ प्रशान्त ने कह कर पूछा, “क्या आप विश्वास करते है?“

हम पहाडी आदमी है, हर पहाडी भूतों को मानता है। उन का अस्तित्व होता है।“ उस शख्स की भूतों की बाते सुन कर कामना और पायल से रहा नही गया। उनकी उत्सुक्ता बढ गई।,

भाई, कुछ बताऔ, भूतों के बारे में। फिल्मी माहौल हो रखा है, कुछ बात बताऔ।“, उस शख्स ने कहा “देखिए, हम तो मानते है। आप जैसा कह रहे हैं, कि शहरों में भूत नजर नही आते, हो सकता है, नजर नहीं आते होगें

मगर पहाडों में तो हम अक्सर देखते रहते है। “कहां से आते है भूत और कैसे होते हैं, कैसे नजर आते है प्रशान्त ने पूछा।

उस शख्स के हाथ में सिगरेट थी, वह सिगरेट को हाथों में घुमाता हुआ बोला “भूत हमारे आपके जैसे ही होते हैं। वे रौशनी में नजर नही आते है।“

होते कौन है भूत, कैसे बनते है पायल ने पूछा। “यहां पहाडों के लोगों का मानना है, कि जो अकस्मास किसी दुर्घटना में मौत के शिकार होते है

या फिर जिनका कत्ल कर दिया जाता है, वे भूत बनते है।“ उस शख्स ने कहा। “क्या वे किसो को नुकसान पहुंचाते है, मारपीट करते हैं” प्रशान्त ने पूछा।

अच्छे भूत किसी को कुछ नुकसान पहुंचाते है अच्छा मैं चलता हूं। सिगरेट मेरे पास है। आप के पास माचिस है, तो दीजिए, सिगरेट सुलगा लेता हूं।

उस शख्स ने कहा। प्रशान्त ने लाईटर निकाल कर जलाया। उस शख्स ने सिगरेट सुलगाई। लाईटर की रौशनी में सिर्फ सिगरेट नजर आई

वह शख्स गायब हो गया। लाईटर बंद होते ही वह शख्स नजर आया। तीनों के मुख से एक साथ निकला – भूत।

तीनों, प्रशान्त, पायल और कामना का शरीर अकड गया और बेसुध होकर एक दूसरे पर गिर पडे। अकडा शरीर, खुली आंखें लगभग मृत्य देह के सामान तीनों मूर्क्षित थे। वह शख्स कुछ दूरी पर खडा सिगरेट पी रहा था।

तभी वहां आर्मी का ट्रक गुजरा। उसने ट्रक को रूकने का ईशारा किया। ट्रक ड्राईवर उसे देख कर समझ गया, कि वह कौन है।,

 ट्रक से आर्मी के जवान उतरे और तीनों को ट्रक पर डाला और शिमला के अस्पताल में भरती कराया। कुछ देर बाद कुमार कार मैकेनिक के साथ एक टैक्सी में आया। अकेली कार को देख परेशान हो गया, कि तीनों कहां गये।

वह शख्स, जो कुछ दूरी पर था, कुमार को बताया, कि ठंड में तीनों की तबीयत खराब हो गई, आर्मी के जवान उन्हें अस्पातल ले गये हैं।,

कह कर वह शख्स विपरीत दिशा की ओर चल दिया। मैकेनिक ने कार ठीक की और कुछ देर बाद शिमला की ओर रवाना हुए।

कुमार सीधा अस्पताल गया। डाक्टर से बात की। डाक्टर ने कहा कि तीनों को सदमा लगा है। वैसे घबराने की कोई आवश्कता नही है

लेकिन सदमें से उभरने में समय लगेगा। कुमार को कुछ समझ नही आया, कि उन्होनें क्या देखा, कि इतने सदमे में आ गए।

अगली सुबह आर्मी ऑफिसर अस्पताल में तीनों को देखने आया। कुमार से कहा – “आई एम कर्नल अरोडा, मेरी यूनिट ने इन तीनों को अस्पातल एडमिट कराया था।“

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कुमार ने पूछा – “मुझे कुछ समझ में नही आ रहा, कि अचानक से क्या हो गया?“ कर्नल अरोडा ने कुमार को रात की बात विस्तार से बताई, कि वह शख्स भूत था, जिसे देख कर तीनों सदमें में चले गए और बेसुध हो गए।

वह एक अच्छा भूत था। अच्छे भूत किसी का नुकसान नही करते। उसने तीनों की मदद की। हमारे ट्रक को रोका और कुमार के वापिस आने तक भी रूका रहा।

शाम तक तीनों को होश आ गया दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिली और सभी दिल्ली वापिस गए, लेकिन सदमें से उभरने में लगभग तीन महीने लग गए।

आज सात साल बीत गए उस घटना को। चारों कभी भी घूमने रात को नही निकलते नाईट लाईफ बंद कर दी।

घर से ऑफिस और ऑफिस से घर, बस यही रूटीन है उन का उस घटना को याद करके आज भी उनका बदन ठंडा होने लगता है।

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