सच्चा ऑटो ड्राइवर Auto Driver Story, Hindi Kahaniya

By | July 29, 2020
सच्चा ऑटो_ ड्राइवर Auto Driver Story Hindi Kahaniya Moral Kahani
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सच्चा ऑटो_ ड्राइवर Auto Driver Story Hindi Kahaniya Moral story

एक छोटे से गांव में शिवा नाम का ऑटो वाला रहता था उनकी पत्नी संगीता और पुत्र भी उनके साथ ही रहते थे गरीब परिवार हर दिन ऑटो चलाते हुए अपनी रोजी-रोटी का गुजारा करते थे हर दिन की तरह शिवा शहर में ऑटो चलाता है Hindi Kahaniya Moral story अचानक राम जी नाम का एक व्यक्ति उसको रोकता है हा भाई कहां जा रहे हो शिवा कॉलोनी तक जाओगे क्या हां हां साहब बिल्कुल सो रुपए लगेंगे ₹100 थोड़ी दूर तो जाना है !

हां जी सर फिर भी ₹100 ही लगेंगे ₹80 ले लो और चलो ठीक है सर बैठिए पैसे ते होते हे व्यक्ति और उसका भाई राम जी और सोमनाथ ऑटो में बैठ जाते हैं वह बैंक में जेवर गिरवी रखकर पैसे लेकर आ रहे हैं यह पैसे खेती रेती में लगाएंगे पता नहीं इस बार खेती ठीक होगी भी या नहीं राम जी की बात सुनकर सोमनाथ जवाब देता है !

और सही कह रहे हो भैया मुझे भी वही डर है पिछले साल भी अच्छी फसल नहीं हुई इस बार भी अगर अच्छी फसल नहीं हुई तो मैं तो काज में डूब जाऊंगा हां भैया क्या करना है पता नहीं चल रहा कुछ भी समझ नहीं आ रहा और हमारे दूसरे उधार भी अभी तक चुके नहीं है बच्चों की पढ़ाई बाकी खर्चा कैसे निकलेगा भैया देखते हैं !

भैया शायद इस बार फसल अच्छी हो जाए तो यह सारे कर देना चाहेंगे बात करते-करते वह कॉलोनी आ गई जहां दोनों भाइयों को उतारना था सर आपका घर आ गया भैया यहीं रोक दो यह लो तुम्हारे पैसे शुक्रिया शिवा ऑटो लेकर वहां से चला जाता है लेकिन ऑटो में गलती से उन दोनों भाइयों का बैग छूट गया !

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दोनों भाइयों में श्री राम जी को याद आता है अरे भैया तुमने बैग पकड़ा था कहां गया ऑटो में भूल गए क्या और वह उसी में पैसे थे भाइयों आप कैसे होगा भैया ऑटो तो चला गया अब क्या होगा इतने सारे पैसे वैसे ही अभी मुसीबत है भैया आप क्या करेंगे यह मैंने क्या किया बातों बातों में मैं भूल ही गया बैग का ऑटो में रह गया !

अब मैं क्या करूंगा वैसे ही अपनी मुसीबत भैया ऑटो वाला शिवा दिनभर ऑटो चला कर शाम को भोजन करने के लिए अपने घर पहुंचता है तभी उसे ऑटोमेटिक बैग रखा हुआ दिखाई देता है उसे खोलकर देखने पर उसमें पैसे थे और यह किसका भाग लिया इसमें पैसे भी हैं अब क्या करूं मैं इतने में शिवा की पत्नी जाती है !

संगीता ईस बैग मैं किय है बैग बहुत पैसे हैं कुछ चिट्ठियां भी रखी है पैसे आप पहले घर के अंदर आएगी कोई देख लेगा इस विषय में किसी को बताना नहीं है इसके पैसे हमें छुपा लेनी चाहिए कैसी बात कर रही हो यह पैसे किसी की जरूरत के हो साकते हौ उसे दे न जाने किस उपयोग के लिए लेकर जा रहा होगा उसका बहुत नुकसान हो गया होगा संगीता हमें ऐसा नहीं करना चाहिए हमारी किस्मत की वजह से यह पैसे मिले इसलिए अभी हमारे हैं !

इसमें हमारी क्या गलती है जो तुम थोड़ी देर चुप रहोगी मैं तो चुप ही हूं सालों से आप मुझे कुछ बोल नहीं देते उसको तो कमाना आता नहीं जैसे तैसे भगवान मेरी पूजा करने के बाद पैसे भेजते हैं तो इन्हें रखने नहीं होते हैं ईमानदारी का भूत चर्चा ची ची ची दूसरों के पैसे अब कैसे रख सकते तुम कब सुधरोगे अपनी मेहनत पर भरोसा करना सीखो सोचो यह पैसे किसके होंगे किस गरीबी में उन्होंने यह पैसे अपने खट्टी कि होंगे कि इस अवसर के लिए उन्हें पैसों की जरूरत होगी तुम्हें तो बस अपना ही सोचता है !

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यह बोलकर ऑटो वाला थोड़ी देर सोचने लगता है कि आखिर यह पिक किसकी है तभी अचानक उसे याद आता है मुझे याद और यह पैसे उन दो भाइयों की होंगे हां जरूर वही बैग छोड़ गए होंगे वही बात कर रहे थे कि वह बैंक से गहने गिरवी रखकर पैसे निकाल कर ला रहे हैं उनके घर में तो बहुत तकलीफ थी मुझे उन्हें यह पैसे लौटा देना चाहिए हां हां लौटा दो आप जिंदगी भर नहीं सुधरोगे कभी अपने बारे में भी सोच लिया करो संगीता वह किसान है !

खेती उगाने के लिए पैसे लाए थे मैं अभी जाकर पुलिस को बता दूंगा वह अपने आप उन दोनों को ढूंढ कर पैसे वापस कर देंगे यह कहकर सेवा पुलिस स्टेशन भाजपा और पुलिस वालों को पूरी कहानी बताता है इंस्पेक्टर साहब शिवा की इमानदारी से बहुत खुश होते हैं तो बहुत इमानदारी हूं आज की दुनिया में अगर तुम्हारे जैसे और लोग हो तो हम पुलिस वालों की जरूरत ही ना पड़े तुम्हारी इमानदारी से मैं बहुत खुश हुआ इस बैग में उन लोगों की जानकारी भी है !

कुछ पेपर से उसे पता लग जाएगा कि वह कहां रहते हैं मैं आज ही उनके पैसे उन्हें वापस करवा दूंगा दोनों इंस्पेक्टर जानकी भाई को देते है भाई दौड़े-दौड़े पुलिस स्टेशन पहुंचते सब में राम जी वह बैग ऑटो में पैसे वाला वह मेरा है साहब हां समझ गया बैठी है !

आखिर आप इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं एक ऑटो में अपने इतने सारे पैसे कौन बोलता है यह तो आपकी किस्मत अच्छी है कि वह ऑटो वाला ईमानदार निकला कल ही आकर आपके पैसे मुझे दे गया था यह लो अपना बैग और अपने पैसे आइंदा ऐसी गलती मत करना हर ऑटो वाला शिवा जैसा ईमानदार नहीं होता आप सही कह रहे हैं !

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साहब हम आगे से ध्यान रखेंगे दोनों भाई अपने पैसे लेकर वहां से चले जाते हैं उसके बाद दोनों भाई मिलकर चावल की एक बोरी लेकर शिवा के घर पहुंचते हैं तुम्हारी ईमानदारी की वजह से इस बार हमारी फसल अच्छी हुई है हम तुम्हारी इमानदारी कभी नहीं भूल पाएंगे यह छोटा सा तोहफा हमारी तरफ से इसकी क्या जरूरत यह तो मेरा फर्ज था पर बहुत-बहुत शुक्रिया मैं खुश हूं कि साला के सारे घर से उतर गए !

शिवा की पत्नी संगीता को अपनी गलती का एहसास होता है कि मुझे माफ कर दीजिए मैंने आपकी ईमानदारी पर शक किया आप वाकई बहुत अच्छे इंसान हैं आगे से मैं भी लालच कभी नहीं करूंगी और आपकी ईमानदारी और मेहनत पर भरोसा करूंगी तो देखा बच्चों ईमानदारी और सच्चाई का फल हमेशा मीठा होता है !

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