लालची कबूतर | dadi ma ki khani speech of 26th | motivational stories in hindi,

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एक बार की बात किसी जंगल में एक बढ़ा सा पेड़ था। उस पेड़ पर प्रतिदिन बहुत
से पक्षी आकर विश्राम करते थे । एक दिन एक बहेलिये ने पक्षी पकड़ने की इच्छा
से वहाँ चावल के दाने फैला दिये और उसके उपर जाल बिछा दिया और स्वयं
एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया ।
कुछ समय बाद उस पेड़ पर एक कबूतरों का झुण्ड आकर विश्राम करने लगा।
तभी उनकी नजर चावलों के दानो पर पड़ी ।

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दाने देखकर उनकी भूख जाग उठी और वह दाने चुगने के लिए जाने लगे।

तब उनके मुखिया ने उन्हे समझाया की उसे इन दानों के पीछे कुछ गड़बड़ लग रही है, इसलिए उन्हे यह दानें नहीं चुगने चाहिए। पर कबूतरो ने अपने मुखियाकी बात नहीं सुनी और दाने चुगने के लिए
चले गए। सारे कबूतर जाल में फंस गए ।

उन्हे अपने मुखिया की बात न मानने तथा लालच करने की सजा मिल गई। नके मुखिया ने उन्हें एक दिशा में उड़ने के लिए कहा |

सब कबूतर जाल के साथ एक ही दिशा में उड़े और बेहलिया देखता ही रह गया ।सब कबूतर अपने मुखिया के दोस्त चूहे के घर जा पहुंचे ।
चूहे ने अपने पैने दाँतो से जाल काट कर कबूतरों को मुक्त कर दिया |

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कबूतरों ने अपने प्राण बचाने वाले नन्हे चूहे को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया और सब
कबूतर नीले आसमान में फिर उड़ गये।

इस तरह हमें पता चलता है कि हमें कभी लालच नहीं करना चाहिए, अन्यथा हम भी कबूतरों की तरह सँकट में फंस सकते है। साथ ही हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि एकता में ही शक्ति है।

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